10 सर्कुलर रोड खाली करने पर भड़कीं राबड़ी देवी, बोलीं- पुलिस बुला लो पर...
10 सर्कुलर रोड बंगले को लेकर राजनीतिक विवाद। सरकार ने लालू परिवार को दिया 15 जून तक का अल्टीमेटम। राबड़ी देवी बोलीं, बंगला खाली नहीं करूंगी। जानें पूरा विवाद।
Updated Jun 06 2026 12:55 PM
Editor: Panthalassa Team | Location: Patna, Bihar, India
Bihar Political News: बिहार के सियासी गलियारे से सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पटना में स्थित 10 सर्कुलर रोड बंगला एक बार फ़िर राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने राज्य सरकार द्वारा ज़ेड-प्लस (Z-Plus) सुरक्षा कवर हटाने पर नाराजगी जताते हुए सख़्त कदम उठाया हैं। उन्होंने अपनी आवास पर तैनात सुरक्षा प्रोटोकॉल के सभी जवानों को वापस भेज दिया है। यह कदम तब उठाया गया, जब बंगला खाली करने का आदेश दिया गया है।
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बंगला खाली नहीं करूंगी
'10 सर्कुलर रोड' स्थित इस बंगले को राज्य सरकार ने पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंद किशोर राम के नाम आवंटित कर दिया है। सरकार के मुताबिक, बिहार विधान परिषद में विपक्ष की नेता के तौर पर राबड़ी देवी को हार्डिंग रोड पर दूसरा सरकारी आवास दिया जा चुका है, लेकिन वहां पर शिफ्ट नहीं हुई हैं। लेकिन अब सरकार ने लालू परिवार को यह बंगला खाली करने के लिए 15 दिनों का मोहलत दिया गया है। इस नोटिस पर राबड़ी देवी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मीडिया से कहा की वे जगह खाली करने के लिए भले ही पुलिस फोर्स बुला ले, लेकिन मैं यह जगह खाली नहीं करूंगी।
सम्राट चौधरी - सरकारी आवास किसी की बपौती नहीं
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शेखपुरा में एक जनसभा के दौरान राजद के नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि मुख्यमंत्री आवास या सरकारी बंगले जनता के होते हैं। इसे किसी की व्यक्तिगत जागीर या पैतृक संपत्ति नहीं माना जा सकता। यह सरकारी आवास कार्यकाल खत्म होने के 24 घंटे के भीतर ही खुद खाली कर देने चाहिए, सरकारी घर सिर्फ आधिकारिक काम के लिए होते हैं।
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10 सर्कुलर रोड क्यों इतना खास है?
10 सर्कुलर रोड बंगला राष्ट्रीय जनता दल का सबसे बड़ा सियासी पावर सेंटर रहा है। जब राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थी, तो उन्होंने यहीं से अपनी पूरी सरकार चलाई थी। यही वजह है कि इस बंगले से लालू परिवार और राजद के समर्थकों का गहरा राजनीतिक और भावनात्मक लगाव है। अब देखना यह है कि 15 जून को अल्टीमेटम खत्म होने पर यह विवाद क्या नया मोड़ लेता हैं।