Bihar Police New Order: 425 संवेदनशील थानों में अब केवल इंस्पेक्टर होंगे थानाध्यक्ष, DGP ने जारी किया आदेश
बिहार में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। DGP विनय कुमार के आदेश के अनुसार राज्य के 425 संवेदनशील और अधिक अपराध वाले थानों में अब केवल इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को थाना अध्यक्ष बनाया जाएगा।
Updated Jun 23 2026 08:23 AM
Editor: Panthalassa Team | Location: Patna, Bihar, India
बिहार में अपराध नियंत्रण, अनुसंधान और कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी व आधुनिक बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य के सबसे ज्यादा अपराध वाले और संवेदनशील 425 थानों में अब केवल इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को ही थाना अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जाएगा। इसकी जानकारी बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने सोमवार को आधिकारिक घोषणा करते हुए आदेश जारी कर दिया है।
अंचल निरीक्षक की शक्तियां भी होंगी प्राप्त
इस नए आदेश के अनुसार इन थानों के थाना अध्यक्षों को अंचल निरीक्षक की जिम्मेदारी भी सौंप गई है। कार्यप्रणाली को सुचारु रूप से चलाने के लिए इन इंस्पेक्टर के अधीन दो अलग-अलग विशेष इकाइयां काम करेगी:
- अनुसंधान इकाई (Investigation Unit): जो केवल मामलों की जांच और कानूनी कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित करेगी।
- विधि-व्यवस्था इकाई (Law and Order Unit): जिसका मुख्य कार्य क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखना होगा।
यह भी पढ़ें:भरत तिवारी एनकाउंटर पर नया खुलासा, इलाज करने वाले डॉक्टर के बयान से उठे बड़े सवाल
थानों की संख्या हुई दोगुनी, दारोगाओं को हटाए जाने के निर्देश
वर्तमान में राज्य में कुल 1,382 थाने स्थित हैं। पुलिस मुख्यालय की समीक्षा में यह बात सामने आई थी कि पटना सहित कई बड़े और संवेदनशील जिलों के महत्वपूर्ण थानों में इंस्पेक्टर के बजाय दरोगाओं को थाना अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जिसकी जानकारी इस महीने सभी जिलों से मांगी गई थी जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।
इस निर्णय के बाद राज्य में इंस्पेक्टर के नियंत्रण वाले थानों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। बिहार में पहले केवल 208 थाने इस श्रेणी में थे, लेकिन अब इसमें और 217 थानों को जोड़ दिया गया है। जिससे कुल संख्या 425 हो गई है।
चयन का आधार: सालाना 350 से अधिक आपराधिक मामले
नए शामिल किए गए 217 थानों का चयन तीन मुख्य मानकों के आधार पर किया गया है:
- थाने का भौगोलिक क्षेत्रफल
- अपराध की संवेदनशीलता
- प्रतिवर्ष दर्ज होने वाले आपराधिक मामलों की संख्या
मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार इस श्रेणी में उन्हीं स्थानों को रखा गया है जहां औसतन हर वर्ष कम से कम 350 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होते हैं।