कोर्ट में बोली बेटी- ये मेरे दुश्मन हैं, पिता ने किया जीवित बेटी का अंतिम संस्कार

Katihar News: बिहार के कटिहार में एक पिता ने कोर्ट में बेटी के बयान से आहत होकर अपनी जीवित बेटी का किया अंतिम संस्कार। जानिए क्या है पूरा मामला।

कोर्ट में बोली बेटी- ये मेरे दुश्मन हैं, पिता ने किया जीवित बेटी का अंतिम संस्कार

Updated Jun 02 2026 05:11 PM

Editor: Panthalassa Team | Location: Katihar, Bihar, India

बिहार के कटिहार जिले से भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां एक पिता ने न केवल अपनी जीवित बेटी को सामाजिक रूप से बहिष्कृत किया, बल्कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उसका अंतिम संस्कार भी किया। 


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कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड अंतर्गत चंदवा पंचायत के कुदना गांव की रहने वाली एक युवती अपने घर से अचानक लापता हो गई थी। परिवार वालों ने अपनी बेटी की काफी तलाश की, लेकिन उसका सुराग नहीं मिला। उसके बाद थक-हारकर उन्होंने रौतारा थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लड़की को बरामद कर लिया है। कानूनी प्रक्रिया के तहत लड़की को कोर्ट में पेश किया गया, जहां हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू कर दिया। 

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यह मेरे परिवार वाले नहीं, दुश्मन हैं

परिजन जब अपनी बेटी से मिलने और उसे घर वापस लाने के लिए कोर्ट पहुंचे, तो बेटी ने कोर्ट में खड़े होकर अपने ही माता-पिता और भाई-बहन को पहचानने से साफ इनकार कर दिया। उसने जज के सामने कहा कि यह लोग मेरे परिवार वाले नहीं है, बल्कि मेरे दुश्मन है। मैं अपने प्रेमी के साथ ही रहूंगी और उसी के साथ जाना चाहती हूं। दरअसल, लड़की अपने प्रेमी से भाग कर शादी कर चुकी थी। अदालत में अपनी ही बेटी के मुंह से ऐसे तीखे शब्द सुनकर माता-पिता और पूरा परिवार पूरी तरह टूट गया। 


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बेटी को मृत मानकर निकाली 'अंतिम यात्रा'

कोर्ट में समाज और कानून के सामने अपनी बेटी के इन तीखे शब्दों से आहत होकर परिवार वालों ने एक फैसला लिया, और उन्होंने तय किया कि जो बेटी उनके प्यार और परवरिश को भूल सकती हैं, उससे सारे रिश्ते हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए।

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हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार परिवार ने अपनी बेटी का पुतला तैयार किया, और उसे अर्थी पर लिटाकर पूरे विधि विधान के साथ गांव में अंतिम यात्रा निकाली। इसके बाद शमशान घाट ले जाकर पिता मुनिलाल पासवान और दादा रामप्रकाश पासवान ने ग्रामीण के मौजूदगी में पुतले का दाह संस्कार कर दिया। पिता ने भरे मन से कहा कि उनकी बेटी अब उनके लिए हमेशा के लिए मर चुकी है।