औरंगाबाद में 14 वर्षीय किशोर के अपहरण को बीते दो साल, न्याय के लिए दर-दर भटक रही मां, आरोपियों से मिल रही जान से मारने की धमकी
औरंगाबाद के हसपुरा में 14 वर्षीय किशोर के अपहरण को दो साल बीत गए, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला। पीड़ित मां ने पुलिस पर लापरवाही और आरोपियों से जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाया।
Updated Jul 02 2026 01:11 PM
Editor: Panthalassa Team | Location: Aurangabad (Bihar), Bihar, India
बिहार का औरंगाबाद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जो पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। हसपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला पिछले दो वर्ष से अपने 14 वर्षीय बेटे की तलाश और न्याय की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही है।
पीड़िता ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि उसका बेटा पिछले दो वर्षों से लापता है। पुलिस अब तक न तो उसके बेटे का पता लगा सकी है और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रही है। आगे महिला ने कहा कि आरोपी परिवार को लगातार जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं।
लस्सी लाने गया था बेटा, फिर कभी घर नहीं लौटा
पीड़ित महिला मनोरमा कुमारी ने बताया कि करीब 2 वर्ष पहले उन्होंने अपने 14 वर्षीय बेटे को ₹100 देकर लस्सी लाने के लिए बाजार भेजा था। काफी देर बीत जाने के बाद जब वह घर वापस नहीं लौटा तो महिला ने अपने बेटे के फोन पर जब कॉल किया तो मोबाइल फोन बंद बताया। जिसके बाद परिवार वालों ने उसकी तलाश शुरू की।
लड़के के परिजनों ने जब खोजबीन करना शुरू किया तो इस दौरान उन्हें जानकारी मिली कि किशोर की स्कूटी डेहरी इलाके में लावारिस हालत में मिली थी। इसके बाद परिवार ने अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस से मदद की गुहार लगाई।
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दो महीने बाद दर्ज हुई एफआईआर, पुलिस पर गंभीर आरोप
मनोरमा कुमारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद हसपुरा थाना पुलिस ने उनकी शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज नहीं की, बल्कि करीब 2 महीने तक उन्हें थाने के चक्कर लगवाए गए। महिला ने बताया कि जब तत्कालीन सर्किल ऑफिसर (सीओ) ने मामले में हस्तक्षेप कर थाना प्रभारी को फटकार लगाई, तब जाकर कांड संख्या 339/24 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस पूरे मामले को अपहरण के बजाय यह कहकर कमजोर करने की कोशिश कर रही है कि किशोर का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था और वह खुद कहीं चला गया।
मेरे बेटे को मारकर लाश गायब कर दी
मनोरमा कुमारी ने इलाके के कुछ लोगों—आलोक, रंजीत, अमित, नीरज और धीरज—पर बेटे के अपहरण और हत्या की आशंका जताई है। उनका आरोप है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पूरे परिवार को धमका रहे हैं।
महिला ने बताया कि आरोपियों ने कहा कि जैसे उनके बेटे का अपहरण कर उसे मार दिया और पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकी, इस तरह पूरे परिवार को भी खत्म कर देंगे। पीड़ित ने यह भी बताया कि ड्यूटी के दौरान उन्हें अब तक चार बार जान से मारने की धमकी मिल चुकी है।
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एसपी से लेकर आईजी तक लगाई गुहार
मनोरमा कुमारी ने बताया कि उन्होंने औरंगाबाद पुलिस अधीक्षक से लेकर आईजी तक अपनी शिकायत लेकर गईं लेकिन अब तक इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब वह वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंची तब संबंधित थाना के पुलिसकर्मियों ने इस मामले को आपसी विवाद बताकर टालने की कोशिश की।
नोट: यह समाचार पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके बयान पर आधारित है। मामले में पुलिस या नामजद आरोपियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।