Parama Ekadashi 2026 Date: कब है परमा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, पारण समय और धार्मिक महत्व
परमा एकादशी 2026 कब है? जानें 11 जून 2026 की परमा एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, पारण समय, धार्मिक महत्व और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के उपाय।
Updated Jun 01 2026 06:31 PM
Editor: Panthalassa Team | Location: Aurangabad (Bihar), Bihar, India
Parama Ekadashi Date 2026: सनातन धर्म में भगवान विष्णु की आराधना करने के लिए एकादशी तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
परमा एकादशी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026, गुरुवार को पड़ रहा है। इस वर्ष की एकादशी अधिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ रही है। इसलिए इस वर्ष 11 जून को आने वाली एकादशी अत्यंत शुभ है।
परमा एकादशी 2026 तिथि और समय
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 11 जून 2026 को रात्रि 12:57 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 11 जून 2026 को रात्रि 10:36 बजे
- व्रत पारण तिथि: 12 जून 2026
- पारण समय: प्रातः 05:23 बजे से 08:10 बजे तक
परमा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परमा एकादशी को अत्यंत दुर्लभ और फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं तथा व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह व्रत विशेष रूप से अधिक मास में आने के कारण अधिक पुण्यदायी मानी जाती है।
परमा एकादशी व्रत विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
- व्रत का संकल्प लें।
- तुलसी दल, पीले पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें।
- विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या विष्णु मंत्रों का जाप करें।
- दिनभर सात्विक आचरण रखें और भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर पारण करें।
क्या मिलता है परमा एकादशी व्रत का फल?
मान्यता है कि परमा एकादशी का व्रत करने से:
- पापों का नाश होता है।
- आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।
- घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
निष्कर्ष
इस साल 2026 में परमा एकादशी का व्रत 11 जून, गुरुवार को रखा जाएगा। अधिक मास में आने के कारण यह एकादशी विशेष रूप से पुण्यदायी मानी जाती है। श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।