महुआ धाम औरंगाबाद : बिहार का वो रहस्यमयी मंदिर, जहाँ 'भूत-प्रेत' से मिलती है मुक्ति
Mahua Dham Aurangabad: बिहार के औरंगाबाद स्थित महुआ धाम (कुटुम्बा) की रहस्यमयी कहानी। जानें कैसे महुआ के पेड़ से प्रकट हुई माँ अष्टभुजी की मूर्ति और क्यों यहाँ चैत-कार्तिक मेले में उमड़ती है 'भूत-प्रेत' बाधा से मुक्ति पाने वालों की भारी भीड़।
Updated Apr 25 2026 10:58 AM
Editor: Panthalassa Team | Location: Aurangabad (Bihar), Bihar, India
Relief from Spirit Possession: बिहार के औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड के अंतर्गत स्थित महुआ धाम इन दोनों आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां की मान्यता इतनी गहरी है कि यह सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और बंगाल में भी प्रसिद्ध है जहां से हजारों की संख्या में लोग आते हैं और अपनी समस्याओं का निवारण करते हैं स्थानीय भाषा में इस जगह को भूतिया मेला भी कहा जाता है।
स्थानीय लोग के अनुसार भूत प्रेत बाधा से पीड़ित लोग यहां पर आते हैं। और मां अष्टभुजी मंदिर के परिसर में पूजा पाठ करते हैं तो उनकी प्रेत बाधा समाप्त हो जाती है।
चैत और कार्तिक मास में उमड़ता है जनसैलाब
वैसे तो यहां पर सालों भर प्रेत बाधा से पीड़ित लोग आना-जाना करते रहते हैं। लेकिन चैत और कार्तिक महीने में यहां का नजारा बिल्कुल अलग होता है। खासकर नवरात्रि के दौरान यहां अजीबोगरीब दृश्य भी देखने को मिलता है। लोगों का मानना है कि इस स्थान पर आने से प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिल जाती है।
अजीबोगरीब नज़ारे और भूतिया मेला
यहां पर आने वाले कई महिला और पुरुष अजीब हरकत करते नजर आते हैं। स्थानीय लोग इसे प्रेत बाधा की मुक्ति की प्रक्रिया मानते हैं। इन्हीं दृश्य के कारण इसे भूतिया मेला कहा जाता है। आज के समय में महुआ धाम औरंगाबाद ही नहीं बल्कि पूरे भारत में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है।
कैसे हुई इस स्थान की उत्पत्ति?
स्थानीय निवासियों और जानकारी के अनुसार इस स्थान का इतिहास लगभग 20 साल पुराना है कहा जाता है। कि यहां पर महुआ के दो विशाल पेड़ हुआ करते थे। दोनों पेड़ के गिरने के बाद वहां से मां अष्टभुजी की प्राचीन मूर्ति प्रकट हुई थी। जिसके बाद विधि विधान से पूजा पाठ शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह एक सिद्ध पीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
महुआ धाम में मिलने वाली मां अष्टभुजी की मूर्ति को देखने के लिए दूसरे राज्य के पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। जिससे यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनते जा रहा है।