अमरूद के छोटे फल झड़ने से हैं परेशान? अपनाएं ये 5 वैज्ञानिक तरीके, पेड़ों पर लद जाएंगे फल

Guava Fruit Drop Solution: अमरूद के छोटे फल बार-बार झड़ रहे हैं? जानें फल गिरने के 5 वैज्ञानिक कारण जैसे पानी की कमी, पोषक तत्वों की कमी, परागण की समस्या, कीट-रोग और हार्मोनल असंतुलन। जानिए अमरूद के फलों को बचाने और उत्पादन बढ़ाने के आसान उपाय।

अमरूद के छोटे फल झड़ने से हैं परेशान? अपनाएं ये 5 वैज्ञानिक तरीके, पेड़ों पर लद जाएंगे फल

Updated Jun 03 2026 03:00 PM

Editor: Panthalassa Team | Location: India

Guava Farming Tips: हर कोई चाहता है कि उसके बगीचे में लगा अमरूद के पेड़ बड़े और मीठे फलों से लदा रहे। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही अमरूद के पौधे में छोटे-छोटे फल लगते हैं, वे झड़ने लगते हैं। कई बार ऐसा होता है कि अमरूद का फल थोड़े बड़े होने पर भी गिर जाते हैं। 

लेकिन आज हम आपको पांच प्रमुख वैज्ञानिक कारण और उनके समाधान बताने वाले हैं जिससे यह समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

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1. वॉटर स्ट्रेस (पानी का गलत प्रबंधन)

गर्मियों के मौसम में लोग अक्सर पौधों में या तो बहुत ज्यादा पानी दे देते हैं या फिर पानी देना ही भूल जाते हैं। जिसके कारण पौधा असंतुलित होकर वॉटर स्ट्रेस में आ जाता है। इसलिए जब पौधा तनाव में होता है तो वह अपनी जान बचाने के लिए फलों और फूलों को नीचे गिराना शुरू कर देता है।

समाधान: इस समस्या के समाधान के लिए आपको हर 2 से 3 दिन में मिट्टी की ऊपरी परत की जांच करनी होगी। ध्यान रहे की मिट्टी में हल्की नमी होनी चाहिए, मिट्टी ज्यादा दलदली नहीं होनी चाहिए। पौधों में नमी बनाए रखने के लिए आप पेड़ की पत्तियों का सहारा ले सकते हैं। इस पेड़ के जड़ों के पास डाल दें ताकि उसमें नमी बनी रहे और पानी जल्दी ना सूखे।

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2. पोषक तत्वों (न्यूट्रिशन) की कमी

जिस तरह से मानव शरीर की हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम की जरूरत होती है। उसी तरह अमरूद के फलों को भी विकास करने के लिए कैल्शियम, बोरॉन और पोटेशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व की जरूरत पड़ती है। अगर पेड़ को यह तत्व ना मिले तो वह कमजोर होकर सूखने लगते हैं या उसे पर लगे फल गिरने लगते हैं।

समाधान: जब अमरूद के पेड़ पर फल मटर के दाने के आकार में हो जाए तब 1 लीटर पानी में 1 ग्राम बोरेक्स पाउडर, 1 ग्राम कैल्शियम नाइट्रेट और 1 ग्राम पोटेशियम सल्फेट मिलाकर घोल तैयार करें। और इसका पेड़ पर छिड़काव करें। इस प्रक्रिया को हर 10 से 12 दिनों में दोहराते रहे। इससे फलों में विकास और हार्मोन का संतुलन बना रहता है।

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3. पॉलिनेशन फेलियर (परागण की कमी)

कई बार ऐसा होता है कि फूलों में सही तरीके से परागण (Pollination) न होने के कारण फल नहीं लग पाते हैं या लगने के बाद जल्दी गिर जाते हैं।

समाधान: इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप अपने बगीचे में सूरजमुखी और गेंदा का फूल लगाएं, इससे मधुमक्खियां आकर्षित होती है। जिससे फूलों में परागण होता है और फल अच्छे लगते हैं।

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4. कीट और फंगस का हमला

फलमक्खी और एंथ्रेक्नोज या विल्ट जैसी बीमारियां फलों के झड़ने का बड़ा कारण हैं। फल मक्खी फलों के अंदर अंडे दे देती है जिसके कारण लार्वा फल के अंदर जाकर उसे खाकर सड़ा देते हैं। जिसकी वजह से फलों पर काले धब्बे पड़ने शुरू हो जाते हैं।

समाधान: इस समस्या को खत्म करने के लिए 1 लीटर पानी में 5 ml जैविक नीम के तेल को मिलाकर हर हफ्ते पौधे पर छिड़काव करें। इसके अलावा बगीचे और पौधों के नीचे साफ सफाई रखें। फल मक्खियों को पेड़ों से दूर रखने के लिए आप ऑनलाइन मिलने वाली फ्लाई ट्रैप का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

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5. हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance)

पौधों में ऑक्सिन (Auxin) और जिब्रेलिन हार्मोन की कमी के कारण संतुलन बिगड़ने से भी फल गिरना शुरू कर देते हैं। ऑक्सिन हार्मोन फलों को पेड़ से चिपकाए रखने के साथ-साथ उसके विकास में भी मदद करता है। अगर इसकी कमी हो जाती है तो फल टूटने लगते हैं।

समाधान: इसके लिए आपको केले के छिलकों को 3 दिन तक पानी में भिगोकर रखना होगा और उसके बाद उस पानी को छानकर पेड़ों के जड़ों में डाल देने से प्राकृतिक ऑक्सीजन सही मात्रा में मिलने लगेगा। इसके बाद फलों का गिरना बंद हो जायेगा। 

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