होर्मुज जलडमरूमध्य में 'डबल ब्लॉकेज': भारत के 33 करोड़ घरों में गहरा सकता है एलपीजी संकट
Hormuz Strait Crisis India: होर्मुज की खाड़ी में अमेरिका-ईरान तनाव से भारत में गहरा सकता है ऊर्जा संकट। 33 करोड़ घरों में गैस किल्लत का खतरा और रिलायंस के तेल आयात पर फंसा पेंच। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Updated Apr 19 2026 12:46 PM
Editor: Panthalassa Team | Location: New Delhi, Delhi, India
नई दिल्ली | पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे बैठक विफल होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूचाल आ गया है। एक तरफ फिरन पहले से जहाज आने-जाने के रास्ते में बाधा डाल रखी थी। तो वहीं अब अमेरिका ने भी इस रास्ते से जहाज को ना गुजरने देने की कड़ी चेतावनी दे दी है। दोनों देशों के बीच बनी यह स्थिति भारत के लिए बड़े ऊर्जा संकट का संकेत दे रही है।
भारत के लिए क्यों है यह 'बड़ी मुसीबत'?
भारत अपनी ऊर्जा के स्रोतों के लिए पूरी तरह दूसरे देश से आयात पर निर्भर है। अगर आंकड़ों को देखा जाए तो यह स्थिति काफी चिंताजनक है।
- तेल और गैस निर्भरता: भारत अपनी कुल खपत का 88% कच्चा तेल और 90% गैस/LPG आयात करता है।
- होर्मुज का महत्व: साल 2025 में भारत का 41% तेल इसी रास्ते से आया था, जो इस साल बढ़कर 65% हो चुका है।
- घरेलू संकट: यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो देश के 33 करोड़ घरों में रसोई गैस (LPG) की किल्लत शुरू हो सकती है।
रिलायंस पेट्रोलियम और 31 दिनों की डेडलाइन
अमेरिका ने रूस और ईरान को कच्चा तेल बेचने के लिए 31 दिनों की जो इजाजत दी थी वह 19 अप्रैल को समाप्त हो रही है। रिलायंस पेट्रोलियम ने इस छूट का लाभ उठाते हुए 50 लाख बैरल तेल खरीदा था। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार वह केवल अभी तक 20 लाख बैरल ही तेल होर्मुज पार कर पाया है। बाकी के 30 लाख बैरल पर अभी भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।