बड़ी खबर: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, कोविड वैक्सीन से हुई मौत और साइड इफेक्ट्स पर केंद्र सरकार को मुआवजा देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों और मृत्यु पर केंद्र सरकार को मुआवजा नीति बनाने का निर्देश दिया है। विस्तार से पढ़ें 'पैंथालासा न्यूज़' पर।

बड़ी खबर: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, कोविड वैक्सीन से हुई मौत और साइड इफेक्ट्स पर केंद्र सरकार को मुआवजा देने का आदेश

Updated Apr 12 2026 10:00 AM

Editor: Panthalassa Team | Location: New Delhi, Delhi, India

नई दिल्ली: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कोविद-19 के टीकाकरण और उसके प्रभाव को लेकर एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने भारत सरकार से साफ तौर पर कहा है कि किसी भी नागरिक की मृत्यु कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभाव (Side Effects) से हुई तो सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती और उन्हें मुआवजा देना होगा। 


'नो-फॉल्ट लायबिलिटी' के तहत मिलेगी राहत

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने 'रचना गंगू बनाम भारत संघ (2026)' मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को 'नो-फॉल्ट लायबिलिटी' (No-Fault Liability) नीति तैयार करने का आदेश दिया है।


इसका सीधा मतलब यह है:

किसी भी पीड़ित परिवार को अब साबित करने के लिए कानूनी जद्दोजहद नहीं करनी होगी कि इसमें किसी के लापरवाही है या वैक्सीन खराब थी। अगर मेडिकल रिपोर्ट में यह पुष्टि हो जाती है कि नुकसान वैक्सीन के कारण हुआ तो सरकार मानवीय आधार और संवैधानिक कर्तव्य के तौर पर आर्थिक सहायता प्रदान करेगी।


केरल हाई कोर्ट के आदेश पर लगी मुहर

इस फैसले की कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई जब केरल हाईकोर्ट ने 2022 में सरकार को निर्देश दिया था कि वैक्सीन के साइड इफेक्ट से प्रभावित लोगों को पहचान की जाए और उनके लिए नियम बनाया जाए। जिस पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई थी, लेकिन अब देश के बड़ी अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए मुआवजा ढांचा तैयार करने का सख्त निर्देश दे दिया है।


संविधान का अनुच्छेद 21 और शारीरिक अखंडता

भारत की बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में अपने फैसले में कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को 'स्वास्थ्य का अधिकार' और 'शारीरिक अखंडता' (Bodily Integrity) की गारंटी देता है। यदि किसी सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान के तहत अगर किसी व्यक्ति को गंभीर शारीरिक क्षति होती है। तो उसकी भरपाई राज्य सरकार को करनी होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय को भी निर्देश दिया की वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभावों से जुड़ा डेटा सार्वजनिक करें ताकि लोग जागरुक और सतर्क रहें।


क्या वैक्सीन असुरक्षित है? विशेषज्ञों की राय

डॉक्टर और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि वैक्सीन असुरक्षित है। लेकिन वैक्सीन से अगर किसी भी व्यक्ति को साइड इफेक्ट होता है तो पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए या फैसला कोर्ट द्वारा लिया गया है।