त्रावणकोर का काला इतिहास: जब महिलाओं को स्तन ढकने के लिए देना पड़ता था 'मूलाकरम' टैक्स, नांगेली ने ऐसे किया विरोध

त्रावणकोर का काला इतिहास: जब महिलाओं को स्तन ढकने के लिए देना पड़ता था 'मूलाकरम' टैक्स, नांगेली ने ऐसे किया विरोध

Mar 24 2026 08:39 pm

Editor: Admin | Location: Kerala, India

  • Download
  • no image
  • no image

19वीं शताब्दी के आरंभ में, केरल के पुराने त्रावणकोर राज्य में 'मूलाकरम' (Mulakkaram) या 'ब्रेस्ट टैक्स' नामक एक अत्यंत अमानवीय प्रथा प्रचलित थी। इस कानून के तहत, निम्न जाति की महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर अपने शरीर का ऊपरी भाग ढकने की अनुमति नहीं थी। यदि कोई महिला अपना शरीर ढकना चाहती थी, तो उसे सरकार को कर देना पड़ता था।


केवल दलित महिलाओं को देना होता था स्तन टैक्स

इतिहासकारों के अनुसार, यह कर महिलाओं के स्तनों के आकार के आधार पर लगाया जाता था। शाही अधिकारी घर-घर जाकर महिलाओं के स्तनों का माप लेते थे और उसी के अनुसार कर वसूलते थे। यह न केवल आर्थिक शोषण था, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान पर भी गहरा प्रभाव डालता था।


नांगेली का साहसी बलिदान

चेरतला की एक बहादुर महिला नांगेली ने इस क्रूर प्रथा का विरोध किया। नांगेली एझवा समुदाय से थीं। जब राजकोषीय अधिकारी कर वसूलने उनके घर आए, तो नांगेली ने कर चुकाने के बजाय अपनी गरिमा के लिए लड़ने का फैसला किया और कर देने से इनकार कर दिया। विरोध में उन्होंने अपने दोनों स्तन काटकर अधिकारियों के सामने केले के पत्तों पर रख दिए। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण नांगेली की मृत्यु हो गई, उनके पति चिरुकंदन अपनी पत्नी के वियोग और अपमान के कारण नांगेली की चिता में कूदकर जान दे दिए।


बदलाव की शुरुआत

नांगेली के इस बलिदान ने पूरे समाज को झकझोर दिया। उनकी मृत्यु के ठीक अगले दिन, त्रावणकोर के राजा ने 'मूलाकरम' कर को वापस लेने का आदेश जारी किया। यद्यपि पूर्ण वस्त्र धारण करने के अधिकार के लिए छायार आंदोलन कई दशकों तक जारी रहा, लेकिन नांगेली के इस बलिदान ने इस कुटिल प्रथा की जड़ों को हिलाकर रख दिया।