Bihar Aurangabad District History: 26 जनवरी 1973 को बना बिहार का यह खास जिला, जानें औरंगाबाद के नाम के पीछे का असली रहस्य
जानिए बिहार के औरंगाबाद जिले का इतिहास, इसका नाम कैसे पड़ा, इसका कुल क्षेत्रफल कितना है और क्यों इसे बिहार का चित्तौड़गढ़ कहा जाता है।
Updated Apr 27 2026 07:59 PM
Editor: Panthalassa Team | Location: Aurangabad (Bihar), Bihar, India
बिहार राज्य का एक ऐसा जिला जिनके रगों में मेवाड़ जैसा शौर्य बसता है। हम बात कर रहे हैं औरंगाबाद जिले की जिसे बिहार का चित्तौड़गढ़ भी कहा जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि औरंगाबाद जिले का नाम कैसे पड़ा और इसकी असली पहचान क्या है? चलिए जानते हैं औरंगाबाद जिले का असली इतिहास।
मुगल इतिहास या सूर्यवंशियों का गढ़?
इतिहासकारों के अनुसार, इस जिले का नाम मुगल शासक और औरंगजेब के नाम पर रखा गया था लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस जिले का सांस्कृतिक पहचान मुगल नहीं बल्कि राजपूत है। यहां के लोग अपने आप को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ और मेवाड़ के वंशज मानते हैं। यही वजह है कि यहां की परंपराओं में आज भी उसे शौर्य की झलक मिलती है।
कब और कैसे बना यह जिला?
बिहार का यह जिला हमेशा से स्वतंत्र नहीं था। 1973 से पहले गया जिले का एक अनुमंडल हुआ करता था। लेकिन 26 जनवरी 1973 को इसे आधिकारिक तौर पर एक अलग जिले की मान्यता दे दी गई थी। आज के समय में यह जिला लगभग 33005 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
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ऐतिहासिक धरोहर के लिए जाना जाता है औरंगाबाद जिला
1. देव सूर्य मंदिर: वास्तु कला का चमत्कार
औरंगाबाद के देव में स्थित देव सूर्य मंदिर विश्व में प्रसिद्ध है। इसकी खास वजह है, पश्चिमाभिमुख' (West-facing) होना। भारत के लगभग हर सूर्य मंदिर का द्वारा पूर्व दिशा की ओर है लेकिन देव मंदिर का द्वार पश्चिम की ओर है। लोक कथाओं के अनुसार जब मुग़ल इस मंदिर को तोड़ने के लिए आए थे। तो यहां के भक्तों के आग्रह पर भगवान सूर्य ने खुद इस मंदिर का मुख को पश्चिम की ओर मोड़ दिया था।
2. उमगा पहाड़ी का रहस्य
मदनपुर प्रखंड में स्थित उम्र पहाड़ी पर 52 मंदिरों के अवशेष मिलते हैं। इस जगह को बिहार के खजुराहो भी कहा जा सकता है। यहां पर मौजूद पत्थर की नक्काशी इतनी बारीकी है कि इसे देखकर आधुनिक तकनीक भी हैरान रह जाएगी। पर्यटन की दृष्टि से यह आज भी एक अछूता रत्न है।
3. बटाने और पुनपुन नदी का संगम
बिहार का औरंगाबाद जिले के धरती पर बताने पुनपुन सन और मनोहर जैसी नदियों का संगम स्थल है। यहां के किसान के लिए सोन नदी एक रीढ़ की तरह है जो उत्तर पश्चिम के सीमा पर बहती है।
4. 'बिहार का चित्तौड़गढ़' क्यों?
बहुत कम लोग ही जानते हैं किऔरंगाबाद जिले को बिहार का चित्तौड़गढ़ क्यों कहा जाता है। इसका मुख्य कारण यहां की मिट्टी में वीरता का वास है। यहाँ के अधिकांश राजपूत परिवार राजस्थान के मेवाड़ और चित्तौड़गढ़ से आकर यहाँ बसे थे। जिन्हें जिन्होंने मुगलों के बाद अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी जिसके कारण इस गौरवशाली जिले का नाम भी मिला।