बिहार के गांवों में हर घर से वसूले जाएंगे ₹1200 टैक्स? जानें सरकार का पूरा प्लान
Bihar Panchayat Tax: बिहार पंचायत टैक्स (Bihar Panchayat Tax) के तहत हर घर से ₹1200 सालाना वसूली की तैयारी चल रही है। जानें सरकार का पूरा प्लान और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें।
Updated Jul 07 2026 11:12 AM
Editor: Panthalassa Team | Location: Patna, Bihar, India
बिहार के ग्रामीण इलाकों में राज्य सरकार एक ऐसा आर्थिक मॉडल लागू करने जा रही है, जिससे ग्राम पंचायत सिर्फ सरकारी फंड के भरोसे नहीं रहेगी बल्कि अपना राजस्व (कमाई) खुद जुटाएंगी। इसके तहत पंचायत को होल्डिंग टैक्स, सफाई, पानी, स्ट्रीट लाइट जैसी जरूरी सेवाओं के बदले शुल्क वसूलने का अधिकार दिया जाएगा।
वित्त विभाग को इस नए प्रस्ताव की हरी झंडी मिल चुकी है, अब सिर्फ कैबिनेट की मंजूरी मिलना बाकी है। आइए समझते हैं आसान भाषा में कि यह पूरा प्लान क्या है, इससे गांव पर क्या असर पड़ेगा और इस पर विवाद क्यों हो रहे हैं?
क्या है सरकार का पूरा प्लान
2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में करीब 1.68 करोड़ परिवार रहते हैं, इन सभी परिवारों से सालाना ₹1200 (यानी करीब 100 रुपये महीना) वसूले जाएं तो पंचायत के पास हर साल लगभग 2020 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड आएगा। राज्य में कुल 8,053 ग्राम पंचायत हैं, इस हिसाब से हर पंचायत को हर साल 25 लाख रुपये की सीधी कमाई होगी। इस पैसे का फायदा यह होगा की पंचायत को नाली-गली के निर्माण, सड़क मरम्मत या सफाई जैसे छोटे-छोटे कामों के लिए केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले फंड का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, वे तुरंत अपने स्तर पर फैसले लेकर विकास कार्य कर सकेंगी।
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टैक्स लगाने के पीछे 16वें वित्त आयोग की शर्त
आयोग की तरफ से बिहार को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच करीब 52 हजार करोड रुपए मिलने है, चालू वित्त वर्ष (2026-27) में राज्य को 6,670 करोड़ रुपये का आवंटन होना है।
बिहार सरकार यह कदम अपनी मर्जी से नहीं बल्कि एक शर्त के दबाव में उठा रही है, 16वें वित्त आयोग ने साफ किया है कि आयोग की तरह से बिहार को मिलने वाली रकम तभी मिलेगी जब बिहार सरकार कुल फंड का करीब 20% हिस्सा (लगभग 1,300 करोड़ रुपये) अपने आंतरिक संसाधनों और टैक्स के जरिए जुटाकर दिखाएगी। इसी शर्त को पूरा करने के लिए सरकार ने गांव में टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है।
अपनों ने ही किया विरोध
इस योजना को लेकर बिहार के पंचायती राज्य मंत्री दीपक प्रकाश ने दिल्ली के राष्ट्रीय कार्यशाला में खुलकर इसका विरोध किया है, उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्यों में, जहां एक बड़ी आबादी की आय बहुत सीमित है ग्रामीण इस तरह का अतिरिक्त टैक्स डालना व्यावहारिक नहीं है। इस शर्त का विरोध केवल बिहार ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने भी किया है।
ग्रामीण के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि टैक्स के पैसे से गांव की स्थिति सुधरेगी या सिर्फ टैक्स का बोझ थमा दिया जाएगा? यदि पंचायत गांव की सूरत सच में बदल देगी तो लोग शायद पैसा खुशी खुशी दे देंगे, लेकिन अगर जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिखा तो यह व्यवस्था एक नया आर्थिक बोझ बनकर रह जाएगी।