11 वर्ष की नौकरी, दो बच्चों की जिम्मेदारी और फिर BPSC क्रैक कर रुचि रानी बनीं SDM
बिहार में रहने वाली रुचि रानी ने 11 साल नौकरी की और दो बच्चों की जिम्मेदारी भी बहुत अच्छे से निभाई और उन्होंने यही दो जिम्मेदारियों के बीच BPSC की तैयारी भी की। तीसरी अटेम्प्ट में उन्होंने 260वीं रैंक हासिल कर SDM बनी।
Updated Oct 12 2026 01:27 PM
Editor: Panthalassa Team | Location: Patna, Bihar, India
बिहार की रुचि रानी ने यह साबित कर दिखाया कि हिम्मत और निरंतर मेहनत से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। शादी के बाद उन्होंने दो बच्चों की जिम्मेदारी उठाई और नौकरी की भी जिम्मेदारी पूरी की पर उसके बावजूद भी उन्होंने BPSC की परीक्षा की तैयारी हमेशा से जारी रखी और कभी भी पीछे नहीं हटीं। वह पिछले 11 साल से एक नौकरी भी कर रही थीं। और इतनी सारी जिम्मेदारियों के बीच में उनके लिए पढ़ाई के लिए समय निकालना इतना आसान नहीं था, पर उन्होंने अपने इस सपने को नहीं छोड़ा और अंत में तीसरे प्रयास में उन्हें सफलता हासिल हुई और वह SDM बन गईं।
माँ के अधूरे सपने को पूरा करने की ललक
रुचि रानी के लिए BPSC की परीक्षा देकर सिर्फ पास करना और नौकरी पाना ही लक्ष्य नहीं था। बल्कि इस सफलता के पीछे उनकी माँ का भी सपना छुपा हुआ था। बहुत पहले उनकी माँ बिहार प्रशासनिक सेवा में अधिकारी बनना चाहती थीं और इसीलिए उन्होंने भी यह परीक्षा दी थी लेकिन वह सफलता प्राप्त नहीं कर पाई थीं। और यह सब को देखते हुए माँ के इस अधूरे सपने को रुचि ने आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखी।
उन्होंने यह तय किया कि वह प्रशासनिक सेवा में जाकर अपनी माँ का सपना पूरा करेंगी और उन्हें गर्व महसूस कराएंगी और इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी तैयारी को जारी रखा और कभी भी हार नहीं मानी।
व्यस्त दिनचर्या के बीच समय का प्रबंधन
रुचि रानी की दिनचर्या काफी व्यस्त रहती थी क्योंकि उन्हें रोज नौकरी पर जाना होता था और घर वापस आने के बाद अपने बच्चों की देखभाल भी करनी पड़ती थी और ऐसे में BPSC की तैयारी के लिए अलग से समय निकालना भी एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जाता है। उन्होंने हमेशा अपने खाली समय का बहुत अच्छे तरीके से इस्तेमाल किया। अपने पढ़ाई के लिए वह बस खाली समय को पाती थीं तो तुरंत काम पर लग जाती थीं जैसे काम करते हुए थोड़ा करंट अफेयर्स सुन लेती थीं तो कभी रात में अपने बच्चों को सुलाने के बाद अपनी खुद की पढ़ाई करती थीं। ऑफिस में खाली वक्त मिलने के समय वे रिवीजन भी करती थीं और इसी तरह उन्होंने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में पढ़ाई को एक बहुत ही महत्वपूर्ण जगह दी।
परिवार का साथ और मनोबल बनाए रखने की चुनौती
उनके इस पूरे कठिन सफर में उनके पति का बहुत बड़ा सहयोग रहा है क्योंकि परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के साथ कॉम्पिटेटिव परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं होता और कई बार निरंतर परिश्रम करने के बाद भी परिणाम पॉजिटिव नहीं मिलता जिससे संभावित निराशा हो सकती है और रुचि रानी के साथ भी ऐसा हुआ पर जब भी उनके मन में ख्याल आते थे या उनका मन अंदर से कमजोर पड़ने लगता था तब वह अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोच कर उन्हें एक अच्छी जिंदगी देने के लिए फिर से मेहनत करने लगती थीं और उन्होंने हमेशा अपने लक्ष्य को याद रखकर निरंतर तैयारी की।
असफलता से सीख और तीसरे प्रयास में शानदार सफलता
हालांकि BPSC की परीक्षा में रुचि रानी को सफलता पहले ही प्रयास में नहीं मिल गई थी पहले प्रयास में उन्होंने प्री की परीक्षा पास कर ली थी और इससे उन्हें आगे की तैयारी करने का हौसला और भरोसा मिला था लेकिन दूसरे प्रयास में वह मुख्य परीक्षा के लिए मात्र कुछ अंकों से पीछे रह गई थीं और यह उनके लिए एक बहुत ही निराशा से भरा हुआ समय था फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी परिश्रम जारी रखीं। तीसरे प्रयास में उन्होंने BPSC की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में 260वीं रैंक हासिल की और SDM बनीं।
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संघर्ष से सफलता तक: महिलाओं के लिए एक मिसाल
अपने किए गए निरंतर मेहनत और प्रयास के कारण आज रुचि रानी बहुत सारी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। रुचि रानी खासकर उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो अपने परिवार और नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच अपने सपने को पूरा करने का समय नहीं निकाल पाती हैं। उनकी सफलता हमें इस बात से अवगत कराती है कि बहुत सारी जिम्मेदारियों के बीच भी हम अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकते हैं। इसीलिए हम सभी को समय का सही इस्तेमाल करना आना चाहिए लगातार मेहनत करनी चाहिए और इन सभी चीजों में परिवार का सहयोग भी बहुत महत्वपूर्ण माना जा सकता है। रुचि रानी ने अपनी किसी भी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दी और आखिरकार अंत में अपने लक्ष्य पर जा पहुंचीं।