Guru Ravidas Jayanti 2026: क्यों मनाई जाती है गुरु रविदास जयंती? जानिए कथा और उनके महत्व
Sant Guru Ravidas Jayanti: संत शिरोमणि गुरु रविदास जी भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत कवि के रूप में जाने जाते हैं, संत रविदास जी की जयंती हर साल माघ पूर्णिमा को मनाई जाती है जो इस वर्ष यानी की 2026 में 1 फरवरी रविवार को आ रही है।
चलिए जानते हैं संत गुरु रविदास जी के जीवनी और उनके संघर्ष के बारे में।
संत गुरु रविदास जी कौन थे?
‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ वाक्य के रचयिता रविदास जी का जन्म वाराणसी के पास सीर गोवर्धनपुर क्षेत्र में हुआ था, जो एक धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है। प्राचीन कथाओं के अनुसार रविदास जी का जन्म चमार जाति में हुआ था जो जूते चप्पल बनाने का काम करते थे। एक समय की बात है जब रविदास जी अपने दुकान के पास जूते चप्पल बना रहे थे तभी वहां से कुछ ब्राह्मण गंगा स्नान के लिए जा रहे थे तो उन्होंने ब्राह्मण से कुछ पैसे देकर कहा कि गंगा जी को इसे वेट चढ़ा दीजिएगा और उन्होंने कहा कि जब गंगा जी खुद इस पेज को अपने हाथ से स्वीकार करेगी तभी उन्हें पैसे दीजिएगा।
ब्राह्मणों ने उनका मजाक उड़ाया और कहा कि भला गंगा जी तुम्हारे पैसे लेने के लिए प्रकट क्यों होंगे इसके बाद ब्राह्मण उनसे पैसे लेकर गंगा स्नान करने चले गए नदी किनारे पहुंचकर उन्होंने गंगा स्नान किया और अपने घर जाने लगे तभी उन्हें याद आया कि रविदास जी उन्हें गंगा जी को पैसे भेंट करने के लिए दिए हैं तो ब्राह्मणों ने रविदास जी के कहे अनुसार गंगा जी से आग्रह किया कि आपका भक्त रविदास आपके लिए कुछ पैसे भेजा है इसे स्वीकार करिए इतना कहते ही गंगा जी स्वयं प्रकट हुई और पैसे को खुद स्वीकार किया जिसके बाद ब्राह्मण आश्चर्य चकित रह गए गंगा जी ने उन्हें एक सोने का कंगन भी दिया और कहा कि मेरे भक्त रविदास को यह कंगन दे देना।
ब्राह्मणों ने वैसा ही किया और रविदास जी को एक कंगन दे दिया जब दूसरे कंगन की बारी आई तो रविदास जी ने अपनी भक्ति से गंगा जी को कठौती में प्रकट कर दिया और इस समय से ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ शब्द की शुरुआत हुई।
