THE Asia University Ranking 2026: भारत के 128 कॉलेज लिस्ट में शामिल, यूनिवर्सिटी रैंकिंग में चीन और जापान को पीछे छोड़ा, देखें लिस्ट।
टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 जारी! भारत ने 128 संस्थानों के साथ जापान और चीन को पछाड़ा। जानें कौन सा भारतीय संस्थान है नंबर 1 और क्या रही टॉप 10 लिस्ट
Updated Apr 25 2026 09:34 AM
Editor: Panthalassa Team | Location: New Delhi, Delhi, India
HE Asia University Rankings 2026: टाइम्स हायर एजुकेशन ने एशियन यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया है। इस साल की रैंकिंग में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है और भारत अभी एशिया में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला देश बन गया है। भारत के 128 संस्थान इस सूची में शामिल है, इस मामले में जापान और चीन को पीछे छोड़ दिया है।
शीर्ष 10 में चीन का दबदबा
एशियाई स्टार पर चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी लगातार आठवें वर्ष अपना पहला स्थान पर बरकरार है। तो वही पेकिंग यूनिवर्सिटी दूसरे स्थान पर अपनी जगह बनाई है। शीर्ष 10 संस्थानों में चीन के 5 विश्वविद्यालय शामिल हैं, जो वैश्विक शिक्षा क्षेत्र में चीन की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
एशिया के टॉप 5 संस्थान:
- सिंघुआ यूनिवर्सिटी (चीन)
- पेकिंग यूनिवर्सिटी (चीन)
- नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (सिंगापुर)
- नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (सिंगापुर) और यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो (जापान) - संयुक्त रूप से
भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन
लेकिन भारत भी इन मामलों में पीछे नहीं है इस वर्ष की जारी लिस्ट में 40 नंबर पर भारत का कोई संस्थान जगह नहीं बन पाया लेकिन भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु (Indian Institute of Science) ने 43वां स्थान जगह बना कर देश का सर्वश्रेष्ठ संस्थान बना हुआ है।
- संस्थान का नाम एशिया - रैंकिंग 2026
- भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु - 43
- सवीथा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज - 128
- आईआईटी इंदौर - 141
- शूलिनी यूनिवर्सिटी - 158
- जामिया मिलिया इस्लामिया - 160
आईआईटी का बहिष्कार
भारत के साथ प्रमुख IIT बॉम्बे, दिल्ली, मद्रास, कानपुर, खड़गपुर, रुड़की और गुवाहाटी ने इस साल भी रैंकिंग की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसमें भाग नहीं लिया था।
विशेषज्ञों का मानना है की संस्थाओं की संख्या बढ़ाना सुखद है लेकिन वैश्विक स्तर पर भारत को टॉप 20 या टॉप टेन में जगह बनाने के लिए रिसर्च और इंटरनेशनल आउटलुक पर और अधिक काम करना होगा।