IMD की बड़ी चेतावनी: El Niño से प्रभावित हो सकता है मानसून, किसानों की बढ़ी चिंता

IMD के अनुसार 2026 में El Niño की स्थिति विकसित हो सकती है, जिससे भारत के मानसून और कृषि पर असर पड़ने की आशंका है। जानिए किसानों के लिए क्या है चेतावनी और तैयारी।

IMD की बड़ी चेतावनी: El Niño से प्रभावित हो सकता है मानसून, किसानों की बढ़ी चिंता

Updated Jun 15 2026 01:28 PM

Editor: Panthalassa Team | Location: New Delhi, Delhi, India

El Niño Impact on India: भारत में मानसून को लेकर एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भारतीय मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के मानसून सीजन के दौरान El Niño की स्थिति बन रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि एल नीनो प्रभावी होता है तो इसका असर देश के कई हिस्सों में वर्षा के पैटर्न पर पड़ सकता है। जिसके कारण कृषि, जल संसाधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।


क्या होता है El Niño?

El Niño एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। यह प्रशांत महासागर के मध्य एवं पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने के कारण विकसित होता है और इसका प्रभाव दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है।

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भारत में एल नीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर पड़ सकता है और कम बारिश होने की संभावना होती है। इतिहास बताता है कि कई वर्षों में एल नीनो के दौरान सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। 


किन राज्यों पर ज्यादा असर पड़ सकता है?

हालांकि अभी यह अनुमान लगाना सही नहीं है कि किन क्षेत्रों में कितनी बारिश होगी, लेकिन मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि निम्नलिखित राज्यों में कम बारिश होने की संभावना है:

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  • बिहार
  • झारखंड
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • छत्तीसगढ़


मानसून पर कैसे पड़ता है असर?

भारत की कृषि व्यवस्था मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर रहती है। देशभर के करोड़ों किसान खरीफ फसलों की बुवाई के लिए मानसूनी बारिश का इंतजार करते हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एल नीनो की स्थिति बनने पर: 

  • कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।
  • मानसून की शुरुआत और प्रगति प्रभावित हो सकती है।
  • कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।
  • जलाशयों और भूजल स्तर पर दबाव बढ़ सकता है।
  • कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है।


किसानों के लिए क्या है सलाह?

  • मौसम विभाग की आधिकारिक अपडेट पर नजर रखें।
  • फसल बुआई का निर्णय स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार लें।
  • जल संरक्षण और सिंचाई प्रबंधन पर ध्यान दें।
  • कृषि विशेषज्ञों द्वारा जारी सलाह का पालन करें।
  • वैकल्पिक फसल योजनाओं पर विचार करें।


सरकार और एजेंसियां कर रही हैं तैयारी

कृषि मंत्रालय और मौसम विभाग लगातार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। देश के किसानों को समय-समय पर मौसम संबंधी आधिकारिक सलाह दी जा रही है, ताकि वे फसलों का चयन और सिंचाई प्रबंधन से जुड़े निर्णय बेहतर तरीके से ले सकें।

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