औरंगाबाद में स्थित देव प्रखंड कार्यालय में 23.49 लाख रुपये की गड़बड़ी, एक कर्मचारी को किया गया गिरफ्तार

औरंगाबाद में स्थित देव प्रखंड कार्यालय में 23.49 लाख रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया है और इसमें एक कर्मचारी को भी गिरफ्तार किया गया है और बहुत से लोगों के खिलाफ अभी भी कार्रवाई जारी है।

औरंगाबाद में स्थित देव प्रखंड कार्यालय में 23.49 लाख रुपये की गड़बड़ी, एक कर्मचारी को किया गया गिरफ्तार

औरंगाबाद में स्थित देव प्रखंड कार्यालय में 23.49 लाख रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया है और इसमें एक कर्मचारी को भी गिरफ्तार किया गया है और बहुत से लोगों के खिलाफ अभी भी कार्रवाई जारी है।


कैसे शुरू हुई ये खबर फैलना?

बिहार के औरंगाबाद के देव प्रखंड कार्यालय में 23.49 लाख रुपये का मामला सामने आया है। यह हुई गड़बड़ी जून 2023 से सितंबर 2025 के बीच की बताई जा रही है। इस मामले में जांच करने के लिए जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में आदेशपाल रंजन उर्फ रंजन गिरी को हिरासत में ले लिया है।

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क्यों की जा रही है अन्य लोगों पर भी कार्रवाई?

इस मामले के तहत कुछ अन्य लोगों के भी नाम सामने आए हैं। इसीलिए आदेशपाल की गिरफ्तारी के बाद फिर से कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रधान लिपिक रिपुसूदन तिवारी, लिपिक शशि कुमार और कोषागार, यह सभी कार्यालय से संबंधित स्टाफ हैं और अब इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। इन सभी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बावजूद जो लोग उस समय इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे उन अधिकारियों से भी जवाब मांगा गया है।


23.49 लाख रुपये का मामला कैसे आया सामने?

कार्यालय में जांच के दौरान सरकारी राशि में की गई गड़बड़ियों का भी पता चला। मौजूद अधिकारियों ने जून 2023 से सितंबर 2025 के रिकॉर्ड को बहुत अच्छी तरीके से चेक किया। इसमें वेतन भुगतान पंजी और एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल पर दर्ज जानकारी का मिलान किया गया। जांच के दौरान यह पता चला कि खाते में से टाइप की हुई राशि से बहुत अधिक ही पैसे निकाले गए थे। कुल 23,49,638 रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। पर इस गड़बड़ी की खबर सुनकर प्रशासन ने अपनी ओर से कार्रवाई शुरू कर दी है।

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क्यों किया गया आदेशपाल रंजन को गिरफ्तार?

इस मामले में पुलिस ने आदेशपाल रंजन उर्फ रंजन गिरी जो उस कार्यालय में काम करते थे उनको गिरफ्तार किया। उन्हें गिरफ्तार करने के अलावा तत्कालीन प्रधान लिपिक रिपुसूदन तिवारी और निम्नवर्गीय लिपिक शशि कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई की गई और उनके भी नाम सामने आए। इन सभी लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। मामले में इन सभी के द्वारा निभाई गई भूमिका की भी जांच की जा रही है।


रिकॉर्ड की जांच करने पर किस प्रकार की गड़बड़ी आई सामने?

इस मामले में वेतन और ऑनलाइन रिकॉर्ड से जुड़े हुए सभी कागजों की कार्रवाई की गई। इसके लिए वेतन पंजी की जानकारी एचआरएमएस पर मौजूद जानकारी से मिलाया गया तो यह देखा गया कि सरकारी खाते से तय की हुई राशि की जगह उससे भी अधिक पैसे निकाले गए थे। यह मामला सामने आने के बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है और संबंधित लोगों के खिलाफ भी सही तरीके से जांच करने की कोशिश कर रहे हैं।

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वहां पर काम करते हुए तत्कालीन अधिकारियों से भी क्यों मांगा गया जवाब?

इस मामले के अनुसार वहां पर काम करते हुए तत्कालीन लोगों से भी जवाब मांगा जा रहा है। इसमें बीडीओ कुंदन कुमार, अंकेश यादव और मीरा कुमारी शामिल हैं। अधिकारियों से जवाब मिलने का इंतजार है और उनके जवाब मिलते ही उनकी भूमिका की जांच की जाएगी और इसी हिसाब से आगे के फैसले किए जाएंगे।


क्यों सरकारी पैसे की निगरानी पर उठे बहुत तरीके के सवाल?

सरकारी पैसों का इस्तेमाल सही ढंग से करना प्रशासन की एक अहम जिम्मेदारी में से एक होती है। और इसके लिए सारी भुगतान रिपोर्ट रखना और समय-समय पर उनकी जांच करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। देव प्रखंड कार्यालय में जांच के वक्त बहुत सारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। अब यह पता लगाना है कि पैसे के हिसाब में कैसे हुई गड़बड़ी और इसके पीछे कौन-कौन शामिल है। पूरी जांच के बाद ही इसकी जानकारी सामने आएगी।

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क्या हो सकती है जांच के बाद आगे की कार्रवाई?

देव प्रखंड कार्यालय में पैसों की गड़बड़ी सुनने के बाद प्रशासन कार्रवाई में लगा हुआ है। एक कर्मचारी को गिरफ्तार भी कर लिया है और कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। वहां मौजूद तत्कालीन अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। अब आगे जांच होने के बाद ही सही जानकारी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद नियमों के आधार पर की जाएगी आगे की कार्रवाई।

औरंगाबाद के देव प्रखंड कार्यालय का मामला सरकारी पैसों के इस्तेमाल को सामने लाता है और सही समय से उनकी जांच और कार्रवाई करने की जरूरत को भी सामने लाता है। फिलहाल तो प्रशासन और पुलिस इस मामले की जांच कर जानकारी इकट्ठा करने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं। पूरी जांच होने के बाद ही लोगों की भूमिका और आगे की कार्रवाई से संबंधित जानकारी मिलेगी।

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