बिहार सरकार के पैसों की लूट! औरंगाबाद में पेड़ों के नाम पर आ रही सैलरी, लेकिन सूख रहे हैं पौधे।

बिहार सरकार के पैसों की लूट! औरंगाबाद में पेड़ों के नाम पर आ रही सैलरी, लेकिन सूख रहे हैं पौधे।

औरंगाबाद: बिहार सरकार द्वारा चलाई गई योजना के तहत गांव-गांव पेड़ लगाए गए थे जिसके लिए सरकार लगाए गए पेड़ों के जगह पर सारी सुविधा उपलब्धि कराई थी जिसमें पेड़ों की सिंचाई के लिए बोरिंग उसे देखभाल के लिए कर्मचारियों को बहाल किया गया था, सरकार के तरफ से सभी सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद भी बहाल किए गए कर्मचारियों की लापरवाही देखने को मिल रही है.

पेड़ों को देखभाल के लिए बहाल किए गए कर्मचारियों को बिहार सरकार के तरफ से हर महीने उनके खाते में सैलरी के रूप में राशि भी आ जाती है पेड़ों को देखभाल करने के लिए भी फंड मिलता है लेकिन इसके बावजूद भी पेड़ों को देखरेख में लापरवाही बढ़ती जा रही है.

पेड़ को पानी देने के लिए लगाए गए बोरिंग से हो रही है खेत की पटवन

औरंगाबाद जिले में कई ऐसे गांव हैं जहां पर पेड़ लगाए तो गए हैं पेड़ों को पानी देने के लिए बोरिंग की भी व्यवस्था की गई है लेकिन इसके बावजूद भी बहाल किए गए कर्मचारियों का पेड़ों के ऊपर कोई ध्यान नहीं है उन्हें टाइम से पेमेंट भी मिल जाती है लेकिन पेड़ की हालत ऐसी हो गई है कि 2 साल होने के बावजूद भी पेड़ों का विकास नहीं हो रहा है.

जिस बोरिंग का उपयोग पेड़ों में पानी देने के लिए होना चाहिए उसे बोरिंग से खेत की पटवन हो रही है लोग बोरिंग को अपने निजी जमीन में लगाकर रखे हैं, जो पेड़ों की पटवन की जगह अपने निजी जमीन की पर खेती करने के काम में लोग इस्तेमाल कर रहे हैं.

सरकार की गलती है या कर्मचारी की?

सभी प्रकार की सुविधा मिलने के बाद भी इस तरह का लापरवाही बरतना गलत बात है, आम लोग ज्यादातर बिहार सरकार को दोषी ठहराते है, लेकिन जब सरकार की तरफ से कर्मचारियों को समय से वेतन और फंड मिलता है तो फिर भी पेड़ का रखरखाव ठीक से क्यों नहीं हो रहा है.