रावण दहन के साथ क्यों जलाया गया 30 फीट का कॉकरोच? जानिए इसके पीछे का अनोखा कारण

दिल्ली के पीतमपुरा में दशहरे पर रावण के साथ 30 फुट का कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। इस फैसले को लेकर सफाई और राजनीति, दोनों चीजों को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

रावण दहन के साथ क्यों जलाया गया 30 फीट का कॉकरोच? जानिए इसके पीछे का अनोखा कारण

Updated Oct 21 2026 02:09 PM

Editor: Panthalassa Team | Location: Delhi, India

दशहरे में प्रतिवर्ष रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले जलाए जाते हैं। दशहरे का त्योहार हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। पर इस वर्ष दिल्ली में दशहरे के दौरान कुछ अलग ही देखने को मिलेगा। इस बार रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का भी पुतला जलाया जाएगा। यह दिल्ली के पीतमपुरा में आयोजित किया जाएगा। वहां के आयोजकों का यह कहना है कि कॉकरोच का पुतला लोगों को गंदगी के खिलाफ जागरूक करेगा। पर यह फैसला लेने के बाद कुछ अलग ही देखने को मिला, लोगों ने इस चीज पर चर्चा का विषय शुरू कर दिया है कि कॉकरोच को चुना ही क्यों गया और वे यह भी जानने में उत्सुक हैं कि क्या इसमें कुछ राजनीतिक मतलब भी है।


यह आयोजन कहां पर और किसकी ओर से किया गया था

यह आयोजन दिल्ली के पीतमपुरा इलाके में स्थित नेताजी सुभाष प्लेस यानी NSP मैदान में आयोजित किया जाने वाला है। श्री केशव रामलीला समिति की ओर से इसकी तैयारी की जा रही है। समिति ने रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों के साथ 30 फुट का कॉकरोच का पुतला भी जलाने के लिए तैयार किया है। इस पुतले के वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद लोग इसके बारे में काफी चर्चा करने लगे हैं। समिति के अध्यक्ष अशोक गोयल देवराहा ने बताया कि कॉकरोच को बुराई और गंदगी का प्रतीक माना गया है। उन्होंने यह कहा है कि इस पुतले के जरिए लोगों को अपने घर, गली और मोहल्ले में सफाई रखने का संदेश दिया जाएगा।

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जानिए आयोजकों ने पुतला जलाने की क्या वजह बताई

श्री केशव रामलीला समिति के अध्यक्ष अशोक गोयल देवराहा ने इस फैसले के पीछे स्वच्छता को एक बहुत ही मुख्य कारण बताया है। वह दिल्ली के मॉडल टाउन में भाजपा के विधायक के पद पर भी हैं। उन्होंने कहा कि कॉकरोच का पुतला लोगों को गंदगी के खिलाफ जागरूक करने का पूर्ण प्रयास करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि घर, गली और मोहल्ले में सफाई रखना बहुत ही आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया है कि समिति ने पहले भी नक्सलवाद और कई सारे मुद्दों के लिए अलग-अलग तरह के पुतलों का इस्तेमाल करके और उन्हें जलाकर लोगों को संदेश दिया गया है। इस बार समिति ने खासकर के गंदगी को एक बहुत ही अहम मुद्दा बनाया है। देवराहा ने यह भी कहा कि इस फैसले का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाना या नीचा दिखाना नहीं है, बल्कि स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली के संदेश को आगे बढ़ाना है।


अभिजीत दीपके ने मुफ्त में प्रचार करने के लिए किया धन्यवाद

कॉकरोच के पुतले के बारे में तेज रफ्तार से चर्चा होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को भी अपनी बात को लोगों के सामने रखने का मौका मिला। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा है कि "मुफ्त में प्रचार करने के लिए धन्यवाद"। उनके इस बयान को एक ताने के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह कहने का प्रयास किया है कि कॉकरोच के पुतले के साथ उनकी भी पार्टी को एक खास पहचान मिल रही है। इससे यह भी पता चलता है कि किसी एक शब्द का अलग-अलग मतलब भी निकाला जा सकता है। समिति इस शब्द का इस्तेमाल करके सफाई को दर्शाना चाह रही है जबकि पार्टी के लोगों के लिए यह एक तरीके से प्रचार का माध्यम है।

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क्यों और कैसे आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) चर्चा में?

कॉकरोच जनता पार्टी का नाम क्यों आया है यह समझने के लिए इस पार्टी के बारे में शुरुआत से जानना काफी आवश्यक है। उस वक्त सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के समय मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कॉकरोच से जुड़ी टिप्पणी सामने आई थी। इस टिप्पणी से कुछ युवाओं ने अपनी असहमति भी जताई। इसके बाद कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल विरोध और गंदगी के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा और कॉकरोच जनता पार्टी नाम इसी प्रकार से बहुत ज्यादा ही लोगों के समक्ष चर्चित हो गया। मुख्य न्यायाधीश ने बाद में कहा था कि उनकी टिप्पणी को काफी गलत तरीके से समझा और पेश किया गया है, उनका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं था। इस घटना से पता चलता है कि कभी-कभी किसी व्यक्ति के मुख से निकला हुआ शब्द लोगों के समक्ष एक बड़े ही चर्चित मुद्दे का रूप ले सकता है। यहां कॉकरोच शब्द भी एक ऐसी ही चर्चा का हिस्सा बन चुका है।


पार्टी के द्वारा किन मुद्दों पर किया जा रहा है विरोध

कॉकरोच जनता पार्टी बहुत से राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात को रखने का प्रयास कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस पार्टी के समूह ने पहले पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विरोध किया था और इस्तीफे की मांग की थी। अब इसके संस्थापक अभिजीत दीपके मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। यह मांग SIR मतदाता सूची में की गई गड़बड़ियों को लेकर की गई है। हालांकि किसी प्रकार के आरोप को पूरी तरीके से सच मानने के लिए पूर्ण जानकारी और सबूत देखना आवश्यक माना गया है। इसीलिए पार्टी की मांग को दिल्ली में दशहरे के साथ जोड़ा गया है, क्योंकि कॉकरोच शब्द एक बहुत ही चर्चित विषय बन चुका है।

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क्या यह पुतला केवल सफाई का प्रतीक दर्शाता है?

इस एक खबर में दो बातों के बारे में साफ पता चल रही है, पहले तो इस पुतले के जरिए लोगों को सफाई का संदेश दिया जा रहा है और दूसरी ओर कॉकरोच शब्द पहले से ही एक राजनीतिक पहलू से जुड़ा हुआ है। इसीलिए लोग इस फैसले का अनेक मतलब निकाल रहे हैं। पर इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि बिना किसी सबूत के किसी भी प्रकार का आरोप लगा देना सही है। इस मामले में समिति की बात के साथ-साथ अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) - तीनों की बातों को समझने का प्रयास करना चाहिए।