क्यों सस्ता हो रहा है सोना? जानें अमेरिकी बॉन्ड कनेक्शन और धनतेरस पर खरीदारी की सही रणनीति
आखिर क्यों गिर रहा है सोने का भाव दिन प्रतिदिन? अमेरिकी बॉन्ड से सोने का क्या कनेक्शन है और धनतेरस के पावन अवसर पर सोना खरीदना सही रहेगा या नहीं, पूरी खबर पढ़कर जानें।
Updated Oct 30 2026 07:44 PM
Editor: Panthalassa Team | Location: Mumbai, Maharashtra, India
धनतेरस और विवाह के सीजन से पहले सोने की कीमत में आई गिरावट ने खरीदारों को बड़ी उलझन में डाल दिया है। जनवरी में 1.7 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंचा सोना, अक्टूबर अंत तक करीब 1.3 लाख रुपये पर आ चुका है। क्या वजह है जिससे सोने की कीमत लगातार गिर रही है और अमेरिका की सरकारी बॉन्ड की यील्ड का इससे क्या नाता है? क्या इस परिस्थिति में धनतेरस पर सोना खरीदना फायदेमंद माना जाएगा या कुछ समय तक प्रतीक्षा करना एक बेहतर उपाय हो सकता है? इस खबर को पढ़कर सोने की कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव के पीछे की पूरी वजह जानने की कोशिश करें।
अभी इस बात की चर्चा काफी तेजी से हो रही है कि क्या इस धनतेरस सोना खरीदने से कहीं घाटे का सौदा तो नहीं हो जाएगा? यह डर लोगों के भीतर इसलिए बैठता जा रहा है क्योंकि सोने के भाव में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। पहले तो यह कहा जा रहा था कि सोने की कीमत 2,00,000 रुपये से ऊपर हो जाएगी। और जनवरी के महीने में यह 1.75 लाख को पार कर गया था और अभी के हिसाब से 1.5 लाख से भी नीचे इसकी कीमत चल रही है।
अक्टूबर-नवंबर का सीजन शादियों का सीजन भी माना जाता है और साथ ही धनतेरस भी पास आ रहा है। तो क्या 1.5 लाख वाला दाम नीचे बने रहने पर प्रसन्न होना चाहिए या चिंता जतानी चाहिए कि जो सोना पहले 1.7 लाख रुपये से ऊपर चल रहा था वह अब 1.5 लाख के नीचे चल रहा है और मन में यह भी सवाल पैदा हो सकता है कि इसकी कीमत कहीं और न गिर जाए। क्योंकि सोने के भाव में गिरावट तो बहुत महीनों से चल रही है।
खरीदारी करने से पहले यह समझने की जरूरत है कि आखिर सोने के दाम में इतने महीनों से गिरावट क्यों आ रही है। जनवरी के महीने में सोना अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका था, 1.7 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से भी ऊपर। और अभी अक्टूबर का अंत आते ही यह घटकर करीब 1.4 लाख के आसपास आ चुका है यानी लगभग दाम में 20% की गिरावट आ चुकी है और प्रतिदिन थोड़ी-बहुत दाम में गिरावट और उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। और इसीलिए इसकी जो सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है वह है कि अमेरिका के बॉन्ड की यील्ड काफी ऊपर बनी हुई है।
अमेरिका का बॉन्ड किसे कहते हैं?
अब यह समझना जरूरी है कि आखिर यह अमेरिका का बॉन्ड होता क्या है और बॉन्ड की यील्ड क्या बताना चाहती है? बॉन्ड का मतलब उधार की रसीद को कहा जाता है जिसका मतलब आसान शब्दों में यह है कि अगर आप किसी से भी उधार लेते हो तो वह आपको एक रसीद देता है कि आपने उससे कितने पैसे उधार लिए हैं और इन पैसों के साथ आपको कितना ब्याज देना तय हुआ है।
जब सरकार अपनी तरफ से बॉन्ड देती है मतलब सरकार आपसे पैसे उधार ले रही है। जब अमेरिका की सरकार यह पैसे उधार लेती है तो उसके बदले में एक कागज दिया जाता है जिसे बॉन्ड कहते हैं और साफ तरीके से इसे अमेरिका की सरकार का बॉन्ड कहा जाता है।
बॉन्ड के ऊपर साफ तरीके से लिखा रहता है कि कुछ साल के बाद पूरे पैसे लौटाने का वादा है और उसका ब्याज सरकार की ओर से दिया जाएगा। यील्ड का मतलब यह होता है कि उस एक बॉन्ड पर सालाना कितना रिटर्न या ब्याज प्राप्त हो रहा है।
मान लीजिए कि अगर 10 साल का अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत है तो इसका मतलब यह है कि आप सरकार को अपनी जेब से 1 लाख डॉलर उधार देते हो तो आपको प्रत्येक वर्ष 5000 डॉलर का ब्याज प्राप्त होगा और 10 साल के बाद मूल रकम पूरी तरह से वापस मिल जाएगी।