Stock Market Crash in 2026: सेंसेक्स और निफ्टी टूटे, कच्चा तेल और रुपया भी दबाव में

भारतीय शेयर बाजार में 23 अक्टूबर को गिरावट देखने को मिली। जानिए सेंसेक्स, निफ्टी, कच्चे तेल की कीमतों और रुपये में कमजोरी की संपूर्ण खबर।

Stock Market Crash in 2026: सेंसेक्स और निफ्टी टूटे, कच्चा तेल और रुपया भी दबाव में

Updated Oct 24 2026 06:23 PM

Editor: Panthalassa Team | Location: New Delhi, Delhi, India

भारतीय शेयर मार्केट में शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 को गिरावट देखने को मिली है। पिछले एक सप्ताह से बाजार में तेजी देखने को मिली थी, लेकिन इस दिन बाजार अचानक से नीचे आ गया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट देखने को मिली है। महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की तरफ से धनराशि निकालने की वजह से बाजार पर दबाव बढ़ा।


सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

शुक्रवार को सेंसेक्स में दिन भर लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन के दौरान ही सेंसेक्स एक प्रतिशत से ज्यादा नीचे गिर चुका था, लेकिन बाद में इसमें थोड़ा सुधार हुआ था। इसके बाद सेंसेक्स 73,123.83 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी भी गिरकर 22,400 अंक के स्तर तक पहुंचा था। हालांकि, बाद में यह 22,600 अंक पर बंद हुआ। इसके बावजूद भी दोनों में गिरावट बनी रही।

Ads


कच्चे तेल की कीमत बढ़ने की वजह से बड़ी चिंता

शेयर बाजार में गिरावट का एक मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमत रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 114.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह पांच महीने से ज्यादा समय का ऊंचा स्तर था। तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से सऊदी अरब में हूती हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ने की चिंता रही। महंगे तेल का असर भारत जैसे देशों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।


तेल की महंगाई बढ़ने से बढ़ सकता है भारत पर दबाव

भारत अपनी जरूरत के अनुसार काफी कच्चा तेल अन्य देशों से खरीदता है। और जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है तब भारत को तेल खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। इससे देश का आयात खर्च काफी बढ़ सकता है। काफी लंबे समय तक तेल की कीमत ऊंची रहने पर डीजल और पेट्रोल की कीमतों पर भी भारी दबाव पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने की भी भारी आशंका रहती है।

Ads

एसबीआई ने साइबर डेटा लीक पर ग्राहकों को दी जानकारी, ग्राहकों द्वारा जमा की गई राशि है सुरक्षित


भारतीय शेयर मार्केट से 3,459 करोड़ रुपये निकाले

भारतीय शेयर मार्केट में गिरावट की एक खास वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली रही। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार से 3,459 करोड़ रुपये निकाल लिए। उनकी बिकवाली की वजह से बाजार में चिंता बढ़ी। इसका असर शुक्रवार के कारोबार पर भारी मात्रा में देखने को मिला।

Ads


घरेलू निवेशकों की खरीदारी से मिली राहत

बाजार में विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने के दौरान घरेलू निवेशकों की खरीदारी से कुछ राहत प्राप्त हुई है। आईपीओ से जुड़े निवेश ने भी बाजार को काफी सहारा दिया। इससे गिरावट का दबाव थोड़ा कम देखने को मिला है। लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से सेंसेक्स और निफ्टी में रफ्तार नहीं आ सकी।


अमेरिका के शेयर बाजार में गिरावट का असर भारत पर भी पड़ा

अमेरिका के अन्य शेयर बाजारों में गिरावट का असर भारतीय बाजारों पर भी बहुत भारी मात्रा में पड़ा है। अमेरिका के शेयर बाजार में बहुत सारी तकनीकी कंपनियों के शेयर नीचे आ गए। एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के कारण निवेशकों की चिंता बहुत बढ़ी। एसएंडपी 500 सूचकांक 1.25 प्रतिशत गिरा, जबकि नैस्डैक में 2.9 प्रतिशत की गिरावट आई। अमेरिकी बाजारों में गिरावट का असर दूसरे बाजारों पर भी भारी मात्रा में पड़ा।

Ads

RBI ने दी मंजूरी: RBL Bank में मिलेंगी Emirates NBD की तीनों ब्रांच, 1 दिसंबर से लागू होगा बड़ा बदलाव


एशियाई बाजारों पर भी पड़ा भारी असर

अमेरिकी बाजारों में गिरावट के बाद एशियाई बाजारों में भी काफी भारी मात्रा में गिरावट और कमजोरी देखने को मिली। जैसे ही बड़े बाजारों में गिरावट देखने को मिलती है उसका असर दुनिया के बाकी बाजारों पर भी हो सकता है। गुरुवार को अमेरिका के अन्य बाजार कमजोर रहे जिसका असर एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली और साथ ही इसका असर भारत के कई बाजारों पर भी पड़ा।

Ads


डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता नजर आया

शेयर बाजार में गिरावट के साथ ही रुपये की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली। शुक्रवार को एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 94.40 रुपये रही। कारोबार के दौरान रुपया गिरकर 94.97 प्रति डॉलर तक पहुंच गया था। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये पर बहुत ही भारी दबाव बनाया।


जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से रुपये को मिला राहत और सहारा

शुक्रवार को रुपये पर भारी दबाव बना हुआ था लेकिन उसके बावजूद भी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़े विदेशी निवेश से कुछ राहत मिली। इस वजह से रुपये की गिरावट ज्यादा मात्रा में बढ़ने से रोकने में राहत मिली। पर इसके अलावा भी कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये पर दबाव बना रहा।

Ads

पेट्रोल पर ₹2.50 और डीजल पर ₹8.50 प्रति लीटर एक्सपोर्ट ड्यूटी, जानें क्या हुआ बदलाव


कच्चे तेल और विदेशी निवेश पर रहेंगी निवेशक की नजरें

शुक्रवार की गिरावट से यह तो पता चल गया कि भारतीय शेयर मार्केट में दुनिया की घटनाओं का भी भारी असर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी बाजारों में गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ी। आगे के आने वाले दिनों में बाजार में तेजी या गिरावट देखने को मिलेगी इसका सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है। इसलिए निवेशकों को बाजार से जुड़ी खबरों और अतिरिक्त जानकारियों पर अवश्य ध्यान देना चाहिए।

Ads