बिहार में मिला सोने से भी कीमती खनिजों का भंडार, चीन की बढ़ेगी टेंशन

Rare Earth Elements India: बिहार में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) और कोबाल्ट जैसे दुर्लभ खनिजों का बड़ा भंडार मिला, जो भारत को टेक और डिफेंस में आत्मनिर्भर बनाएगा।

बिहार में मिला सोने से भी कीमती खनिजों का भंडार, चीन की बढ़ेगी टेंशन

Updated May 21 2026 11:19 AM

Editor: Panthalassa Team | Location: Banka, Bihar, India

REE deposit in Bihar: हमारे देश में सोने को सिर्फ एक साधारण धातु नहीं मानते हैं, बल्कि यह हमारी परंपराओं, शादियों और पूजा पाठ का एक अहम हिस्सा है। लेकिन बिहार इस समय एक वजह से सुर्खियों में है, क्योंकि यहां सोने से भी कहीं ज्यादा कीमती एक चीज मिली है, जिससे बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और भारत को रक्षा, टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा।


बिहार में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का एक बहुत बड़ा भंडार मिला है, जिसे लेकर केंद्र सरकार ने राज्य के 14 ब्लॉकों की पहचान की है, जिसकी नीलामी जल्द शुरू होने वाली है। बिहार के खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने बताया कि इन खनिजों में ग्लॉकोनाइट, कोबाल्ट, पैलेडियम, टाइटेनियम जैसे चीजें शामिल हैं। भागलपुर के बटेश्वरस्थान क्षेत्र में रेयर अर्थ एलिमेंट्स और बांका जिले में कोबाल्ट होने की बात सामने आई है।

Ads


रेयर अर्थ एलिमेंट्स क्या हैं और क्यों हैं ये इतने जरूरी?

रेयर अर्थ एलिमेंट्स ऐसे रासायनिक तत्व हैं, जो प्रकृति में बहुत कम मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें कुल 17 रासायनिक तत्व होते हैं, जो आज की आधुनिक दुनिया में इसकी अहमियत सबसे ज्यादा है। इसका इस्तेमाल रक्षा क्षेत्र में लड़ाकू विमान, रडार, मिसाइल, ड्रोन और सेना के संचार उपकरण बनाने में किया जाता है। साथ में स्मार्टफोन, लैपटॉप, कैमरा लेंस, टीवी स्क्रीन, स्पीकर और कंप्यूटर की हार्ड डिस्क बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाता है।


आखिर इसे निकालना और शुद्ध करना इतना मुश्किल क्यों है?

इसे जमीन से निकाल कर इस्तेमाल के लायक बनाना बेहद ही कठिन काम है। यह तत्व अपने साइज में एक-दूसरे से इतने मिले होते हैं कि इन्हें अलग करना बहुत ही मुश्किल है। इसे अलग करने के लिए के लिए बहुत ही जटिल और लंबी प्रक्रिया होती है, जिसमें 'लिक्विड-लिक्विड सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन' तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए सेटलिंग टैंक्स, मिक्सर, टैंक स्टेज, तेज एसिड और खास ऑर्गेनिक केमिकल्स की जरूरत पड़ती है।

Ads


इसे लैब में अलग करना बहुत ही आसान है, लेकिन बड़े पैमाने पर फैक्ट्री स्तर में अलग करने के लिए महंगे उपकरणों, सटीक कंट्रोल और बहुत बड़े स्तर के विशेषज्ञ ज्ञान की जरूरत होती है। इस काम को करने के लिए चीन के पास हजारों अनुभवी इंजीनियर्स हैं, जबकि दुनिया के बाकी देशों में ऐसे एक्सपर्ट्स की काफी कमी है। इसे अलग करने की प्रक्रिया में भारी मात्रा में जहरीला कचरा निकलता है, जिससे निपटने और पर्यावरण के सख्त नियमों का पालन करने में भारी खर्च आता है।


बिहार और भारत के लिए यह क्यों है बड़ा मौका?

बिहार का यह भंडार भारत की तकदीर को बदल सकता है, फिलहाल पूरी दुनिया में इस रासायनिक तत्व पर चीन का एकतरफा कब्जा है। यह खोज भारत को चीन पर निर्भरता को खत्म करने में मदद करेगी, और यह खनन शुरू होने से बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, नए उद्योग लगेंगे, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे।

Ads