विवेक नायक का नाम बड़े सम्मान के साथ झारखंड के कोने-कोने में लिया जाता है। वह एक साधारण और छोटे से परिवार में जन्मे विवेक ने अपनी मेहनत के दम पर एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। वे सपनों की नगरी मुंबई अपनी किस्मत आजमाने गए थे, लेकिन वहां सफलता न मिलने पर उन्हें वापस अपने गांव लौटना पड़ा। हार मानने के बजाय, उन्होंने अपनी जड़ों से जुड़कर नए सिरे से शुरुआत की। आज उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो इंसान अपनी माटी में रहकर भी आसमान छू सकता है।